September 7, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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सावधान! क्या आपके पास भी ऐसे फोन आ रहे हैं?

अन्नपूर्णा भंडार की राशि प्राप्त होने में अब कुछ दिन शेष रह गए हैं. लेकिन इस बीच सिलीगुड़ी तथा आसपास के क्षेत्रों में लाभार्थियों के मोबाइल नंबर पर अज्ञात नंबर से फोन आने की शिकायत मिल रही है, जिसमें कहा जाता है कि वह बीडीओ या एसडीओ ऑफिस से बोल रहे हैं. आपका अन्नपूर्णा भंडार का स्टेटस वेरीफाई किया जा रहा है. इसलिए मेरे कुछ सवालों के जवाब दें!

वह आपको अपनी बातों के जाल में फसाते हैं. अन्नपूर्णा भंडार से बात शुरू होती है और ओटीपी तक पहुंच जाती है. वे इतने चालाक है कि यह भी कहते हैं कि अगर आप ऑनलाइन ओटीपी प्रक्रिया में भाग नहीं लेना चाहते हैं तो, आप सीधे ऑफिस में पहुंचे और भौतिक रूप से उपस्थित होकर वेरिफिकेशन कराएं. अनेक महिलाएं बीडीओ ऑफिस या एसडीओ ऑफिस की भीड़भाड़ या दौड़ धूप से बचने के लिए ऑनलाइन वेरिफिकेशन के लिए हां भर देती है.

उसके बाद से अज्ञात व्यक्ति के द्वारा ऑनलाइन गेम खेला जाता है. आपका पर्सनल डिटेल्स लेने के बाद दूसरी तरफ से आपके मोबाइल पर आए ओटीपी को मांगा जाता है. अज्ञात कॉल में कहा जाता है कि आपका वेरिफिकेशन किया जा रहा है. इसलिए ओटीपी बताना जरूरी है. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपका वेरीफिकेशन नहीं होगा. ऐसे में आपका फॉर्म रिजेक्ट हो जाएगा. अगर इस तरह के कॉल आपको प्राप्त हो रहे हो या होने वाले हो तो सावधान हो जाइए. क्योंकि यह साइबर अपराधियों की एक नयी चाल है.

सिलीगुड़ी के अलग-अलग क्षेत्रों से इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं. आपको बता दें कि वर्तमान में ऑनलाइन वेरिफिकेशन का काम नहीं चल रहा है. कम से कम सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में तो यह बिल्कुल भी नहीं है. अधिकांश लाभार्थियों के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है. इसलिए आप ऐसे किसी अज्ञात नंबर से आए फोन पर यकीन नहीं करें.

सिलीगुड़ी के ही एक व्यक्ति ने साइबर अपराधियों के फ्रॉड का शिकार होकर अपने खाते से 2 लाख से ज्यादा रकम गंवा दी. अब इस व्यक्ति ने केंद्रीय साइबर क्राइम पोर्टल के साथ-साथ सिलीगुड़ी पुलिस के साइबर क्राइम थाने में भी शिकायत दर्ज करा दी है. मिल रही जानकारी के अनुसार इस व्यक्ति के मोबाइल पर एक कॉल आया था. दूसरी ओर से कहा गया कि आपने अपने आवास और प्रतिष्ठान के बिजली बिल का भुगतान नहीं किया है, इसलिए आपका कनेक्शन काटा जा रहा है.

उक्त व्यक्ति ने बताया कि उनका बिजली बिल का भुगतान बहुत पहले हो चुका है और इसकी उनके पास रसीद भी है. दूसरी तरफ से कहा गया कि आप व्हाट्सएप के जरिए रसीद भेज दें. इसके बाद व्यक्ति ने भुगतान रसीद भेज दिया. कुछ देर के बाद अज्ञात व्यक्ति ने फिर कहा, आपके बिजली बिल के भुगतान का अपडेट नहीं हुआ है. इसलिए इसको अपडेट करना होगा. या तो आप बिजली बिल केंद्र में जाकर भुगतान अपडेट कर लें या फिर ऑनलाइन प्रक्रिया में सहयोग करें.

व्यक्ति ने सोचा कि बिजली बिल सेवा केंद्र जाने के लिए वक्त निकालना होगा. उससे अच्छा है कि ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करवा ले. व्यक्ति ने पूछा कि मुझे क्या करना होगा. दूसरी तरफ से कहा गया कि आप ऑनलाइन बने रहिए और जैसा मैं कर रहा हूं, उसमें सहयोग बनाए रखिए. उसके बाद अज्ञात व्यक्ति ने कुछ ही क्षण में कहा कि आपके नंबर पर एक ओटीपी गया होगा. दूसरी तरफ से कहा गया कि वह अपना ओटीपी नंबर बताएं. इसके बाद उनका बिजली भुगतान अपडेट हो जाएगा.

बिना सोचे विचारे उक्त व्यक्ति ने मोबाइल नं.पर आए ओटीपी को अज्ञात व्यक्ति को शेयर कर दिया. दूसरी ओर से कहा गया कि आपका काम हो गया है. व्यक्ति मन ही मन खुश था कि अब उसे बिजली विभाग नहीं जाना होगा. बैठे-बैठे काम हो गया. लेकिन कुछ ही देर के बाद जब उसके मोबाइल पर मैसेज आने लगे तो उसके हाथ पांव फूल उठे. उसके बैंक की तरफ से तीन मैसेज आए. उसके खाते से तीन बार में 2 लाख 15 हजार रुपए की निकासी की गई थी.

उक्त व्यक्ति को देर से पता चला कि उसके साथ साइबर फ्रॉड हुआ है. इसके बाद वह सिलीगुड़ी साइबर थाने पहुंचा और उसने साइबर सेल में जाकर उसके साथ हुई वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई. उसने केंद्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर भी इसकी शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस अपनी कार्रवाई कर रही है. इस समाचार को आप तक पहुंचाने का हमारा देश उद्देश्य यही है कि आप सतर्क रहें. क्योंकि कोई भी वास्तविक संस्थान ओटीपी की मांग नहीं करता. यहां तक कि बैंक भी नहीं और यह बात शुरू से ही बताई जा रही है लेकिन फिर भी लोग सावधान नहीं हो रहे हैं.

आजकल साइबर ठगों ने लोगों को लूटने का एक और अनोखा तरीका ढूंढ लिया है. वे आपके व्हाट्सएप को हैक कर रहे हैं. ऐसे में बिना ओटीपी के ही आपके बैंक खाते से पैसे उड़ा दिए जाते हैं. सिलीगुड़ी में ऐसी घटनाएं कई घट चुकी हैं. इसका एहसास व्यक्ति को तब होता है जब उसके मोबाइल पर बैंक से पैसे निकाले जाने का संदेश प्राप्त होता है.

साइबर हैकर आपके मित्र, भाई, रिश्तेदार, किसी को भी अपना शिकार बना सकते हैं. वे उनके मोबाइल पर लिंक भेजेंगे और उनसे शेयर करने के लिए कहेंगे. जन उपयोगी मैसेज के पीछे उनका निहित स्वार्थ भी छिपा होता है. जैसे ही आप अपने रिश्तेदार या करीबी के द्वारा व्हाट्सएप पर भेजे गए लिंक को क्लिक करते हैं, साइबर अपराधियों के जाल में फस जाते हैं. फिर बड़ी आसानी से आपके व्हाट्सएप पर उनका एक्सेस हो जाता है.

आपके लिए बेहतर सलाह है कि अगर आप स्मार्टफोन चलाते हैं तो सावधानी से चलाएं. फालतू एप्स डाउनलोड ना करें. बहुत से एप्स साइबर फ्रॉड के हो सकते हैं. अपना मोबाइल किसी अनजान व्यक्ति को कॉल करने के लिए ना दें. भूल कर भी किसी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, पिन नंबर, अकाउंट नंबर अथवा अन्य पर्सनल जानकारियां साझा ना करें. ना ही अनजान लिंक पर क्लिक करें. चाहे वह आपके परिवार या करीबी किसी के द्वारा फॉरवर्ड किया गया हो. अगर कोई व्यक्ति आपके किसी करीबी के व्हाट्सएप के जरिए सहयोग मांगता है तो उसे सहयोग राशि देने के बजाय सीधे अपने करीबी से बात करके सच्चाई का पता लगा लें. इस तरह की कुछ छोटी-मोटी सावधानियां बरत कर आज के समय में साइबर फ्रॉड से बचा जा सकता है.

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