किसी ने सच ही कहा है कि बोया पेड़ बबुल का तो आम कहां से होए! सत्ता में रहते हुए जो लोग गलती करते हैं, सत्ता से बाहर होने के बाद उन्हें अपनी गलती की कीमत चुकानी पड़ती है. लोग बताते हैं कि जब प्रदेश में टीएमसी की सरकार थी, तो टीएमसी के नेता बहती गंगा में हाथ धो रहे थे. अब उन्हें अपने किए की सजा भुगतनी पड़ रही है.
राजनीतिक विश्लेषक और जानकार मानते हैं कि टीएमसी की मुसीबतें आने वाले समय में और बढ़ने वाली है. सिलीगुड़ी के आसपास जमीन से जुड़े मामले में टीएमसी नेता काजल घोष जेल में है तो उधर टीएमसी के राज्यसभा सदस्य अहमद हुसैन नदीम उल हक की मुसीबतें भी बढ़ गई है. उनके कोलकाता से लेकर रांची और दिल्ली तक के कम से कम 8 ठिकानों पर ED ने रेड डाला है.
टीएमसी नेता काजल घोष पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन पर अवैध कब्जा किया. जब उन्हें सिलीगुड़ी महकमा कोर्ट में पेश किया जा रहा था तो उन पर अंडे भी बरसाए गए थे. उन्हें चोर चोर भी कहा गया. फिलहाल काजल घोष तीन दिनों के पुलिस रिमांड पर हैं.
टीएमसी के राज्यसभा सांसद नदीमुल हक टीएमसी में एक कद्दावर नेता के रूप में जाने जाते हैं. प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने आज सुबह टीएमसी सांसद के कोलकाता, रांची और दिल्ली के लगभग 8 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है. प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी हवाला मामले से जुड़े विभिन्न मामलों में रेड डाल रहे हैं.
केंद्रीय जांच एजेंसी के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार टीएमसी के इस नेता के खिलाफ की जा रही कार्रवाई वास्तव में उनके समाचार पत्र से जुड़ी विभिन्न वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर है. टीएमसी सांसद इस समाचार पत्र से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं. इस समाचार पत्र के खिलाफ अगस्त महीने में बड़े स्तर पर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई गई थी.
टीएमसी सांसद नदीम उल हक का कोलकाता के पार्क सर्कस में निजी आवास है. सुबह तडके प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों की टीम उनके आवास पर पहुंच गई और उनके कार्यालय पर रेड डाला. उस समय सांसद आवास में मौजूद लोग हक्का-बका थे. किसी को संभलने का मौका भी नहीं मिला और प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने सांसद के आवास को अपने राडार पर ले लिया.
सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार टीएमसी सांसद का दिल्ली में भी आवास और प्रतिष्ठान हैं. उनके झारखंड की राजधानी रांची में भी कुछ प्रतिष्ठान हैं. दबिश देने से पहले अधिकारियों ने सांसद के सभी प्रतिष्ठानों और उनसे जुड़ी संबंधित जानकारियां एकत्र कर ली थी और यही कारण है कि एक साथ विभिन्न प्रदेशों में स्थित उनके ठिकानों पर रेड डाला गया.
प्रर्वतन निदेशालय के अधिकारियों की इस जांच करवाई में अब तक क्या-क्या चीज हासिल हुई हैं, उनके आवास और ठिकानों से कितने दस्तावेज बरामद हुए हैं, कौन-कौन से दस्तावेज मिले हैं, इन सभी के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है. पर समझा जाता है कि जांच अधिकारियों की कार्रवाई आगे भी इस मामले में चलती रहेगी और यह भी आशंका व्यक्त की जा रही है कि टीएमसी के कुछ और नेता पकड़े जा सकते हैं.
जिस तरह से टीएमसी के नेताओं और उनके कार्यालय पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई चल रही है, उसको लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले ही कह चुकी है कि देश और प्रदेश में लोकतंत्र नहीं रहा. ममता बनर्जी भाजपा और केंद्र के खिलाफ धरना प्रदर्शन की बात कह चुकी हैं. दूसरी तरफ राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में टीएमसी के और दूसरे कद्दावर नेता जिनमें अभिषेक बनर्जी भी शामिल है, की गिरफ्तारी तक हो सकती है.

