सिलीगुड़ी: चाय बागानों की समस्याओं और चाय श्रमिकों की विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को सिलीगुड़ी के दागापुर स्थित श्रमिक भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। श्रमिक भवन के सम्मेलन कक्ष में हुई इस बैठक में राज्य के श्रम एवं परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह, दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्टा, श्रम विभाग के अधिकारी और कई चाय बागान प्रबंधन के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में आगामी पूजा से पहले चाय श्रमिकों को बोनस देने और लंबे समय से बंद पड़े चाय बागानों को दोबारा खोलने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया।
बैठक के बाद दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्टा ने बताया कि नई सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही चाय बागानों और चाय श्रमिकों की समस्याओं को लेकर काम शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले करीब चार महीनों से इस दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। सांसद के मुताबिक, पूजा से पहले चाय श्रमिकों को 20 प्रतिशत बोनस दिलाना सरकार की प्राथमिकता है।
शुक्रवार की बैठक में चाय बागान प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि 5 अक्टूबर तक श्रमिकों को 20 प्रतिशत बोनस का भुगतान करना होगा। यानी पूजा से पहले श्रमिकों को बोनस मिलना सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने समयसीमा तय कर दी है।
इसके साथ ही लंबे समय से बंद पड़े चाय बागानों को लेकर भी बैठक में कड़ा रुख अपनाया गया। राजू बिष्टा ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान श्रम विभाग के निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं हुआ और कई चाय बागानों का संचालन मनमाने तरीके से किया गया। उनके अनुसार, इसका असर चाय उद्योग की स्थिति पर पड़ा और धीरे-धीरे कई बागान कमजोर होते गए, जिसका सीधा असर वहां काम करने वाले श्रमिकों और उनके परिवारों पर पड़ा।
राजू बिष्टा ने बताया कि मौजूदा सरकार चाय बागानों की स्थिति में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। बैठक में बंद पड़े चाय बागानों को लेकर भी एक महत्वपूर्ण समयसीमा तय की गई है। सभी बंद चाय बागानों को अगले 10 दिनों के भीतर खोलने का निर्देश दिया गया है।
उन्होंने कहा कि यदि तय समयसीमा के भीतर संबंधित चाय बागान नहीं खोले जाते हैं, तो सरकार आवश्यक कार्रवाई करेगी। जरूरत पड़ने पर इन बागानों को किसी दूसरी उपयुक्त संस्था के हाथों सौंपने पर भी सरकार विचार कर सकती है।
दार्जिलिंग के सांसद के अनुसार, फिलहाल उत्तर बंगाल में करीब 25 से 30 चाय बागान बंद हैं। इन बंद बागानों के कारण करीब 70 से 80 हजार चाय श्रमिक और उनके परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में सरकार के सामने एक ओर पूजा से पहले 20 प्रतिशत बोनस सुनिश्चित करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर बंद पड़े चाय बागानों को दोबारा शुरू करने की जिम्मेदारी भी है।
शुक्रवार की बैठक में चाय बागान प्रबंधन के प्रतिनिधियों के साथ विस्तार से चर्चा के बाद बोनस और बागान खोलने के लिए स्पष्ट समयसीमा तय कर दी गई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि 5 अक्टूबर तक 20 प्रतिशत बोनस और 10 दिनों में बंद चाय बागानों को खोलने के इन निर्देशों को जमीन पर कितनी तेजी से लागू किया जाता है।

