जिस तरह से चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में हिंसा मुक्त चुनाव कराया है, ठीक उसी तरह से सोमवार को मतगणना कराने जा रही है. मतगणना के दौरान गिनती केन्द्रो पर अथवा आसपास में घूमते अराजक तत्वों से निबटने, बदमाशों को ठिकाने लगाने की चुनाव आयोग ने पूरी तैयारी कर रखी है. चप्पे चप्पे पर केंद्रीय बल तैनात दिखेंगे. सूत्र बता रहे हैं कि उस दिन केंद्रीय बलों को सभी जरूरी अधिकार दिए जा सकते हैं. टीएमसी और भाजपा दोनों ही दलों के नेता काफी आशान्वित दिख रहे हैं.जबकि बीजेपी का आत्मविश्वास एग्जिट पोल ने बढ़ा दिया है.
भारत की सर्वोच्च अदालत पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के इंतजामात, मतगणना कराने के सुरक्षा इंतजाम, केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति आदि संपूर्ण व्यवस्थाओं से प्रभावित लगती है. सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी को भारी झटका देते हुए चुनाव आयोग के समर्थन में अपना फैसला दे दिया है यानी मतगणना में चुनाव आयोग का सर्कुलर ही प्रभावी रहेगा. सियासी गलियारो में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गूंज सुनाई देती रही.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए दार्जिलिंग भाजपा सांसद राजू बिष्ट ने कहा है कि टीएमसी अपनी संभावित हार देखकर बौखला गई है. जनता ने टीएमसी का पतन कर दिया है. राजू विष्ट ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक इकाई है. वह शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए सभी तरह के प्रबंध कर सकता है. यह अदालत का विषय नहीं है.यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के मामलों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया.
वोटिंग समाप्त होने के बाद अब सबकी निगाहें मतगणना पर टिकी है.लेकिन उससे पहले बंगाल में कई जगह छिटपुट हिंसा की घटनाएं घट रही हैं. स्ट्रांग रूम विवाद को लेकर पहले ही दिन टीएमसी का विरोध सामने आया. टीएमसी को लगता है कि केंद्रीय कर्मचारी स्ट्रांग रूम के भीतर तथा मतगणना के समय कोई गड़बड़ी कर सकते हैं. अतः पार्टी के द्वारा पहले कोलकाता हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई. उसके बाद पार्टी सुप्रीम कोर्ट भी गई. लेकिन दोनों ही अदालतों में टीएमसी को मुंह की खानी पड़ी है.
तृणमूल कांग्रेस ने केंद्रीय कर्मचारियों को पर्यवेक्षक बनाए जाने के खिलाफ अर्जी दाखिल की थी. आज राज्य के दक्षिण 24 परगना जिले के 15 मतदान केन्द्रों पर पुनःमतदान हुआ. इनमें मगरहाट पश्चिम के 11 और डायमंड हार्बर के चार मतदान केंद्र शामिल है. भारी तादाद में मतदाताओं ने वोट डाला. आरंभ में कुछ हंगामे के बाद मतदान शांतिपूर्ण संपन्न हुआ. टीएमसी नेता पर आरोप लगा कि उन्होंने मतदाताओं को डराया और धमकाया.
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयान तथा टीएमसी के आंतरिक सूत्रों से मिल रही जानकारी के बाद टीएमसी सोमवार को कराई जाने वाली मतगणना को लेकर काफी सतर्कता बरत रही है.अब कोलकाता हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट से मुंह की खाने के बाद टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने अपने काउंटिंग एजेंट पर भरोसा जताया है. आज उन्होंने संध्या समय वर्चुअल तरीके से राज्य के सभी टीएमसी काउंटिंग एजेंटों के साथ एक बैठक की और उन्हें मतगणना पर कडी नजर रखने की सलाह दी.
इस बीच चुनाव आयोग ने 4 तारीख को मतगणना को केंद्र करके सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं. डिजिटल और भौतिक दोनों दृष्टिकोण से कई परतों की कड़ी सुरक्षा की है. चुनाव आयोग की सुरक्षा ऐसी है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता है.राज्य के संवेदनशील क्षेत्रों में हिंसा की आशंका को देखते हुए केंद्रीय बलों को सजग रहने के लिए कहा गया है. केंद्रीय बल मतगणना के बाद भी कई दिनों तक रुके रहेंगे.क्योंकि बंगाल का अब तक का इतिहास चुनाव के बाद हिंसा और खून से सना हुआ है. चुनाव आयोग नहीं चाहता है कि किसी भी पार्टी को कानून हाथ में लेने और हिंसा भड़काने की छूट मिले.
सोमवार को किसकी सरकार बनती है, यह तो पता नहीं लेकिन इस बीच कांग्रेस ने संकेत दिया है कि अगर राज्य में त्रिशंकु सरकार बनती है तो कांग्रेस किंग मेकर की भूमिका निभाएगी और टीएमसी को शर्तों के आधार पर समर्थन दे सकती है. हालांकि स्वयं कांग्रेस को भी पता नहीं है कि उसे कितनी सीटें आएंगी.

