October 15, 2026
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यहां 360 दिन बैंक लॉकर में रहती हैं मां दुर्गा! 400 साल पुरानी परंपरा, सपने में मिला था स्वर्ण प्रतिमा स्थापित करने का संकेत !

Here, Goddess Durga lives in a bank locker for 360 days! This 400-year-old tradition, prompted by a dream, suggests installing a golden statue!

शारदीय नवरात्रि के दौरान देशभर में मां दुर्गा की आराधना की जाती है। कहीं भव्य पंडाल सजते हैं, तो कहीं सदियों पुरानी परंपराओं के साथ पूजा-अर्चना होती है। लेकिन पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में एक ऐसी दुर्गा पूजा होती है, जिसकी परंपरा जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। यहां जयपुर राजबाड़ी में मां दुर्गा की स्वर्ण प्रतिमा साल के लगभग 360 दिन बैंक लॉकर में सुरक्षित रखी जाती है। दुर्गा पूजा के दौरान षष्ठी के दिन प्रतिमा को कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच राजबाड़ी लाया जाता है और पूजा संपन्न होने के बाद दशमी के दिन फिर बैंक लॉकर में रख दिया जाता है।

करीब 400 साल पुरानी बताई जाने वाली जयपुर राजबाड़ी की दुर्गा पूजा अपनी ऐतिहासिक परंपरा, मां की स्वर्ण प्रतिमा और चांदी के चालचित्र के कारण विशेष पहचान रखती है।

राजा काशीनाथ सिंह को सपने में मिला था संकेत!

राजपरिवार से मिली जानकारी के मुताबिक, जयपुर राजबाड़ी की दुर्गा पूजा करीब 400 साल पुरानी धार्मिक परंपरा से जुड़ी है। मान्यता है कि राजा जयसिंह के समय से इस क्षेत्र में राजपरिवार की धार्मिक परंपराओं की शुरुआत हुई थी। शुरुआती दौर में यहां मिट्टी की प्रतिमा स्थापित कर पारंपरिक तरीके से मां दुर्गा की पूजा की जाती थी।

बाद में राजा काशीनाथ सिंह के समय पूजा के दौरान मंदिर में आग लगने की घटना हुई। इसके बाद राजा ने मां दुर्गा की स्वर्ण प्रतिमा स्थापित करने का संकल्प लिया। राजपरिवार से जुड़ी मान्यता के अनुसार, राजा काशीनाथ सिंह को सपने में मां दुर्गा ने स्वर्ण प्रतिमा स्थापित करने का संकेत दिया था।

इसके बाद राजपरिवार ने अपने कोष से सोना निकालकर बनारस के कारीगरों को बुलाया। उन्हीं कारीगरों से मां दुर्गा की स्वर्ण प्रतिमा और चांदी का चालचित्र तैयार कराया गया। राजपरिवार के मुताबिक, इनके निर्माण में बड़ी मात्रा में सोने और चांदी का इस्तेमाल किया गया था।

चोरी की घटना के बाद बदली सुरक्षा व्यवस्था

जयपुर राजबाड़ी में चोरी की एक घटना के बाद मां दुर्गा की स्वर्ण प्रतिमा की सुरक्षा को लेकर विशेष व्यवस्था की गई। बताया जाता है कि चोर राजबाड़ी में घुसे और कई कीमती सामान तथा आभूषण लेकर फरार हो गए। इस घटना के बाद पुलिस की सलाह पर स्वर्ण प्रतिमा को पूजा के दिनों को छोड़कर पूरे साल बैंक लॉकर में रखने का फैसला लिया गया।

तभी से यह परंपरा जारी है। हर साल षष्ठी के दिन प्रतिमा को पुलिस सुरक्षा के बीच राजबाड़ी लाया जाता है और पूजा समाप्त होने के बाद दशमी को फिर बैंक लॉकर में सुरक्षित रख दिया जाता है।

पांच दिनों तक होगी पूजा, दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

जयपुर राजपरिवार के सदस्य प्रशांत नारायण सिंह देव के मुताबिक, यह पूजा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। उन्होंने बताया कि पहले पूजा चार दिनों तक होती थी, जबकि इस बार इसे पांच दिनों तक आयोजित करने की तैयारी है।

वहीं, राजबाड़ी की पुरानी परंपराओं से जुड़ी रूनी बनर्जी के मुताबिक, पहले यहां दुर्गा पूजा बेहद भव्य तरीके से आयोजित होती थी। उस समय राजबाड़ी में हाथी-घोड़े और बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रहती थी। पूजा का स्वरूप काफी विशाल हुआ करता था। हालांकि, चोरी की घटना के बाद स्वर्ण प्रतिमा की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए।

आज भी पूजा षष्ठी से शुरू होती है और पूरी व्यवस्था पुलिस की कड़ी निगरानी में संचालित होती है। इस दौरान पुरुलिया के अलावा पश्चिम बंगाल के अन्य जिलों और दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु जयपुर पहुंचते हैं।

स्वर्ण प्रतिमा और चांदी का चालचित्र हैं सबसे बड़ा आकर्षण

जयपुर राजबाड़ी की दुर्गा पूजा का सबसे बड़ा आकर्षण मां दुर्गा की स्वर्ण प्रतिमा और चांदी का चालचित्र है। मां यहां द्विभुजा स्वरूप में विराजमान हैं। सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताओं, राजपरिवार की परंपराओं और अनोखी सुरक्षा व्यवस्था के कारण यह पूजा अपनी अलग पहचान रखती है।

शारदीय नवरात्रि के दौरान मां की स्वर्ण प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है। साल के अधिकांश समय बैंक लॉकर में सुरक्षित रहने वाली मां की प्रतिमा को देखने का अवसर भक्तों के लिए बेहद खास होता है। जयपुर राजबाड़ी की यह परंपरा आज भी पश्चिम बंगाल की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की एक अनूठी मिसाल बनी हुई है।

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