June 29, 2026
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बोलेगा राष्ट्रवादी बंगाल, सुनेगा सारा जहां!

Nationalist Bengal will speak, the whole world will listen

आजादी के बाद से कई दशक गुजर गए. लेकिन बंगाल की सरकारों ने राष्ट्रवाद के नाम पर ऐसा कोई अभियान नहीं चलाया, जो आज भाजपा की सरकार और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में दिख रहा है. पिछली सरकारों ने अपनी राजनीति क्षेत्रीयता और तुष्टीकरण पर केंद्रित कर रखी थी. बंगाल की पहचान, संस्कृति और राष्ट्रवाद के नाम पर केवल और केवल राजनीति की गई.

लेकिन बंगाल में भाजपा सरकार के आते ही बंगाल की पारंपरिक छवि, स्वतंत्रता आंदोलन की राष्ट्रवाद शैली तथा राष्ट्रीय एकता और बंगाल की संप्रभुता की लौ जलने लगी है. 1 महीने से अधिक पुरानी इस सरकार ने केंद्र सरकार के सभी राष्ट्रवादी मंत्रों को अपनाना शुरू कर दिया है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी कहते हैं कि बंगाल का गौरव राष्ट्रवाद अपनी पुरानी पहचान के रूप में सामने आ रहा है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दूसरे भाजपा शासित राज्यों की तरह प्रदेश की संस्कृति और गौरव का विस्तार करना शुरू कर दिया है.

एक तरफ उनकी सरकार ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है तो दूसरी तरफ प्रशासनिक कार्यों की पारदर्शिता को सर्वोपरि रखा है. ऊपर से नीचे तक कई बदलाव किए गए हैं. आने वाले समय में असम की तर्ज पर यहां समान नागरिक संहिता, लैंड, और लव जिहाद के विरोध में सख्त कानून लाए जाएंगे. इसी सत्र में बंगाल सरकार जन सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियां नियंत्रण विधेयक 2026 पेश करने जा रही है.

इसका मकसद सार्वजनिक अव्यवस्था, तोड़फोड़ और संगठित अपराधों से सख्ती से निपटना है. विधेयक में असमाजिक गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों की हिरासत, संपत्ति जब्तीऔर पुलिस को व्यापक शक्तियां देने का प्रावधान है. विपक्ष ने इस बिल को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं. सुवेंदु अधिकारी ने बंगाल को बदलने और पुराना गौरव वापस लाने का संकल्प लिया है. इस दिशा में उन्होंने ताबड़तोड़ फैसले लेने शुरू कर दिये है. सूत्र बता रहे हैं कि शुभेंदु अधिकारी के कार्यों से केंद्र सरकार भी संतुष्ट है.

पिछली सरकारों ने फुटपाथ अतिक्रमण तथा अवैध निर्माण के खिलाफ कोई कारगर अभियान अथवा नीति नहीं अपनायी, जिसके चलते सिलीगुड़ी से लेकर पूरे बंगाल में फुटपाथों पर जगह-जगह दुकान तथा अन्य प्रकार के कब्जे हुए. इसी तरह से पिछली सरकारों की लापरवाही के चलते अवैध निर्माण को रोकने में सफलता नहीं मिली.अब सुप्रीम कोर्ट ने भी फुटपाथ अतिक्रमण को गैर कानूनी मानते हुए इसे केवल आम जनता के लिए स्वीकृत किया है, तो दूसरी तरफ अवैध निर्माण के खिलाफ कोलकाता हाई कोर्ट के फैसले ने सरकार को इस दिशा में ठोस कार्रवाई करने का रास्ता दिखाया है.

राज्य सरकार इस दिशा में प्रशासनिक सुधार लाने जा रही है. प्रशासनिक सुधार के मार्ग पर चलते हुए सुवेंदु अधिकारी ने एक और बड़ी घोषणा कर दी है कि अब से सरकारी छुट्टियों और वीकेंड पर भी सरकारी दफ्तर बंद नहीं रहेंगे. कर्मचारी रोटेशन प्रणाली पर काम करेंगे अर्थात शनिवार, रविवार और अन्य सरकारी छुट्टियों के दिन भी दफ्तर खुले रहेंगे. कर्मचारियों को कार्यालय में आना होगा. इस संदर्भ में अधिसूचना भी सरकार ने जारी कर दी है. इसका असर निकले स्तर के विभागों पर भी पड़ना तय है. आने वाले कुछ दिनों में रविवार, शनिवार या छुट्टियों में जिलाधिकारी, महकमा शासक और बीडियो कार्यालय खुले मिलेंगे तो इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं होगी.

इस तरह से पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार ने एक तरफ बंगाल की पुरानी पहचान राष्ट्रवाद की संस्कृति को पुनर्जीवित किया है तो दूसरी तरफ प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक इतिहास कायम करने की ओर लगातार काम कर रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुवेंदु अधिकारी युवा और जोश से भरे हैं.राष्ट्रवाद उनका लक्ष्य है और प्रशासनिक सुधार के जरिए बंगाल और देश की जनता में बंगाल की पुरानी पहचान, संस्कृति और गौरव को लौटाना चाहते हैं. बहरहाल, थोड़े ही दिनों में बंगाल में राष्ट्रवाद की चर्चा शुरू हो गई है. जानकार मानते हैं कि यह तो एक ट्रेलर है, बंगाल में असली राष्ट्रवाद अब आने वाला है.

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