आम तौर पर घर आए मेहमानों का स्वागत होता है. जब आपके घर पर मेहमान आते हैं तो आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. लेकिन एक मेहमान कल भी आए थे जो जजमान को दर्द देकर गए हैं. जजमान डॉक्टर और सिलीगुड़ी के आईवीएफ सेंटर है. और मेहमान इनकम टैक्स विभाग के अधिकारी. सिलीगुड़ी के आईवीएफ सेंटर के डॉक्टरों और अस्पताल के अधिकारियों ने कल्पना तक नहीं की थी कि सुबह सवेरे उनके घर और अस्पताल पर कुछ अवांछित मेहमान आ जाएंगे, जिनके बारे में पहले से कोई जानकारी या आहट तक नहीं थी.
सिलीगुड़ी के अस्पतालों की दुनिया में यह पहला अवसर था, जब आईटी विभाग के अधिकारियों ने एक साथ 10 या अधिक ठिकानों पर रेड डाला था. ना तो अस्पताल प्रबंधन को आहट थी और ना ही डॉक्टर को. यही कारण रहा कि जब आईटी विभाग के अधिकारियों ने अपना परिचय दिया तो उनके होश ही उड़ गए. एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल और भागम भाग ही सिलीगुड़ी में देखने को मिला. जब भी आईटी विभाग अथवा केंद्रीय एजेंसी रेड की कार्रवाई करती है तो जहां रेड डाला जाता है, वहां के कर्मचारी या मालिक इस स्थिति में नहीं होते कि वह अपना काम तक कर सके. उन्हें जैसे सांप सूंघ जाता है.
कुछ इसी तरह का नजारा सिलीगुड़ी में देखा गया और यही कारण है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था. अब तक रेड की कार्रवाई में दुकान अथवा प्रतिष्ठान शामिल होते थे. यह पहला मौका है, जब डॉक्टर के आवास पर भी आईटी विभाग ने रेड डाला है. दरअसल इसकी योजना तो तभी बन गई थी, जब गृह मंत्री अमित शाह सिलीगुड़ी के दौरे पर आए थे और उत्तर कन्या में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की थी. अमित शाह को सिलीगुड़ी के आईवीएफ सेंटर, कुछ डॉक्टर और अस्पताल अधिकारियों द्वारा मरीज के बिल और लेनदेन में भ्रष्टाचार, बिल की वास्तविकता को नजरअंदाज करना तथा अनियमित तरीके से मरीज से पैसे बनाकर उसे बेनामी संपत्ति में निवेश करना, इत्यादि के बारे में जानकारी दी गई थी.
सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय गृह मंत्री के द्वारा केंद्रीय एजेंसी को कार्रवाई करने की हरी झंडी दे दी गई थी. उसी समय से केंद्रीय एजेंसी आयकर विभाग के अधिकारी सिलीगुड़ी और आसपास के स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों तथा भ्रष्टाचार या गलत तरीके से बेनामी संपत्ति में निवेश करने वाले सिलीगुड़ी के कुछ डॉक्टरों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए थे.और जब उन्हें डॉक्टर के खिलाफ सबूत मिल गए तब उन्होंने रेड की यह कार्रवाई की है.
आईटी विभाग की इस कार्रवाई में सिलीगुड़ी के कई नामचीन डॉक्टर भी शामिल है. आरोप है कि इन डॉक्टर्स अथवा उनके अस्पतालों ने पैसे के लेनदेन में अनियमित बरती है. यह भी आरोप है कि उन्होंने कालाबाजारी, टैक्स चोरी, हवाला के जरिए , आदि अन्य तरीकों से कालाबाजारी की है. जो भी हो, सिलीगुड़ी के अस्पताल और आईवीएफ सेंटर डॉक्टर रेजिडेंट के खिलाफ पक्के सबूत मिल जाने के बाद आयकर विभाग की बड़ी टीम तैयार की गई. इस टीम ने पानी टंकी चौकी के अंतर्गत के आसपास आश्रम पाडा, नजरुल सारणी रोड स्थित एक अस्पताल, आईवीएफ सेंटर एक हेल्थ केयर आदि पर रेड डाला. इनकम टैक्स अधिकारियों के साथ केंद्रीय सुरक्षा बल भी उनकी सुरक्षा के लिए थे.
आयकर विभाग की अलग-अलग टीमों ने भक्ति नगर, डॉन बॉस्को के आसपास, सालूगाडा आदि स्थानों में स्थित आईवीएफ सेंटर या स्वास्थ्य केन्द्र में रेड डाला और वहां से काफी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज, लैपटॉप तथा दूसरे उपकरण बरामद किए. यह सिलीगुड़ी के इतिहास में पहला अवसर होगा, जब लगभग 10 से ज्यादा डॉक्टर, अस्पताल आदि पर आईटी अधिकारियों ने रेड डाला था. हालांकि आईटी विभाग के इस रेड में अधिकारियों को क्या-क्या चीजे मिली है, इसके बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं है और ना ही डॉक्टर या प्रबंधन अधिकारियों की तरफ से जानकारी मिल पाई है.
सूत्रों ने बताया है कि रेड कार्रवाई में जब्त दस्तावेजों में बांग्लादेशी मरीजों से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है. आईटी विभाग यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि संबंधित नर्सिंग होम और आईवीएफ सेंटर कितने बांग्लादेशी दंपतियों का इलाज कर रहे थे. वहां कितने बच्चों का जन्म हुआ और उनके दस्तावेजों की स्थिति क्या है? इस बारे में भी आईटी विभाग के अधिकारी जांच कर रहे हैं. जल्द ही आईटी विभाग की ओर से एक बड़ा खुलासा किया जा सकता है.

