एक समय था जब जहांगीर खान उर्फ पुष्पा का फालता विधानसभा क्षेत्र में डंका बजता था. वह आतंक का पर्याय बन चुका था. कई लोग व्यंग्यात्मक ढंग से मजाक में कहते थे. लोग कहते थे कि वह शोले फिल्म का गब्बर था. जहां किसी बच्चे के रोने पर मां कहती थी कि चुप हो जा, वरना गब्बर (जहांगीर खान) आ जाएगा! इलाके में सबको डरा कर रखने वाले पुष्पा के लिए जेल में मजबूत इंतजाम किया जा रहा है. शायद उसकी बाकी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे कटे. एसटीएफ की लगभग ऐसी ही तैयारी है.
पुष्पा उर्फ जहांगीर खान के खिलाफ इतने मामले हैं कि कोर्ट का चक्कर लगाते लगाते उसकी बाकी जिंदगी खत्म हो जाएगी. जेल भेजे जाने से पहले पुलिस उसकी जुबान खुलवाएगी. बड़े-बड़े महारथी नप सकते हैं. टीएमसी के कई कद्दावर नेता जेल जा सकते हैं. जहांगीर खान को अभिषेक बनर्जी का दाहिना हाथ माना जाता है. जानकार मानते हैं कि टीएमसी नेताओं के कई राज वह जानता है. पुलिस उससे राज खुलवाने की कोशिश करेगी.
उसके खिलाफ कई आरोप हैं. फालता विधानसभा क्षेत्र में गरजता था पुष्पा. उसके आतंक से किसी की जुबान नहीं खुलती थी. वह अपने क्षेत्र के लोगों को वोट देने से रोकता था. पुष्पा के आतंक के शिकार ऐसे कई लोग पुष्पा की गिरफ्तारी के बाद अब सामने आ रहे हैं. जिस दिन पुष्पा पकड़ा गया, उस दिन फालता में दिवाली मनाई गई. फालता के लोगों ने उसके ऑफिस में घुसकर तोड़फोड़ मचाई. उसने अपने केबिन में राहत सामग्री रखी थी. फालता के लोगों ने अपनी खूब भड़ास निकाली. पुष्पा उर्फ जहांगीर खान के प्रति लोगों की नफरत और गुस्सा इस कदर है कि उत्तर बंगाल में भी यहां की जनता ने उस पर सड़े हुए अंडे फेंकने की तैयारी कर ली थी.
जनता के आक्रोश से बचाने के लिए दार्जिलिंग जिला पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम उसको भारत नेपाल सीमा स्थित पानी टंकी क्षेत्र से गिरफ्तार करने के बाद चिंता में पड़ गई कि उसे कहां रखा जाए. क्योंकि जैसे-जैसे लोगों को पता चलता था, हिंसक भीड़ थाने में एकत्र हो जाती थी. खोडीबाडी थाना, फांसी देवा थाना, सिलीगुड़ी, बागडोगरा सब जगह लोग इस उम्मीद में पहुंच जाते थे कि यहां जहांगीर खान उर्फ पुष्पा को लाया जाएगा.
संयुक्त बल सर्वप्रथम अपनी जीप में जहांगीर को लेकर खोरीबारी थाना पहुंची थी. लेकिन तब तक हिंसक भीड़ को पता चल गया. भीड़ खोड़ीबाड़ी थाना के बाहर जमा थी. जहांगीर खान उर्फ पुष्पा को लेकर आ रही जीप के अधिकारियों ने माहौल अच्छा नहीं देखकर जीप को वापस दूसरी दिशा में मोड़ लिया और फिर ऐसे थाने की तलाश शुरू हुई जहां पुष्पा को कुछ समय के लिए लॉक अप में रखा जा सकता था. जहांगीर खान उर्फ पुष्पा की गिरफ्तारी दोपहर में ही हो गई थी.
पिछले कुछ समय से पूरे बंगाल में टीएमसी नेताओं पर हमले हो रहे हैं. उन पर सड़े हुए अंडे फेंके जा रहे हैं. कहीं ऐसी स्थिति इसके साथ ना हो, संयुक्त टीम को इसकी चिंता थी. इसलिए हंगामा रोकने के लिए पुलिस अधिकारी अपनी जीप में पुष्पा को इधर से उधर घुमाते रहे थे. कहीं कोई सुरक्षित जगह नहीं मिल रही थी. इस बीच उसे कोलकाता ले जाने के लिए एयर टिकट और दूसरे सुरक्षा इंतजाम भी किए जाते रहे.
जब काफी समय हो गया तो संयुक्त बल ने उसे फांसीदेवा थाना के लॉकअप में रखा. लेकिन यहां भी भीड़ को पता चल गया. हालांकि यहां सुरक्षा के व्यापक इंतजाम थे. इसके बावजूद भीड चोर चोर के नारे लगाती रही. जैसे-जैसे समय गुजर रहा था, पुलिस अधिकारियों की भी चिंता बढ़ती जा रही थी. इस बीच फ्लाइट टिकट का इंतजाम हो गया तो शाम 4:30 बजे पुलिस ने उसे फांसीदेवा थाना के लॉकअप से निकाला और पिछले दरवाजे से बागडोगरा एयरपोर्ट ले गई. यहां से पुलिस अधिकारी जहांगीर खान को कोलकाता ले गए.
आपको बताते चलें कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही जहांगीर खान उर्फ पुष्पा फरार चल रहा था. उसकी तलाशी के लिए सरकार ने एसटीएफ को दायित्व दिया था. पुष्पा की तलाश करता हुआ एसटीएफ सिलीगुड़ी पहुंचा. एसटीएफ के लोगों को पता चला कि जहांगीर खान उत्तर बंगाल में रह रहा है और नेपाल भागने की तैयारी कर रहा था. एसटीएफ की टीम ने जहांगीर खान को गिरफ्तार करने के लिए एक रणनीति बनाई और दार्जिलिंग जिला पुलिस की मदद से उसे अंजाम दिया.
यह वही जहांगीर खान उर्फ पुष्पा है जो एक समय सोशल मीडिया पर छाया था. विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं को धमकाने के आरोप में जहांगीर खान सुर्खियों में था. चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक तथा सिंहम के नाम से मशहूर अजय पाल शर्मा को जहांगीर खान पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई. अजय पाल शर्मा जहांगीर खान के घर पहुंचे और उसके परिवार तथा समर्थकों को चेतावनी देते हुए कहा कि उसको अच्छी तरह से समझा देना. वरना अफसोस करने का भी समय नहीं मिलेगा.
घटना इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गयी थी. जब अजय पाल शर्मा सिंहम बनकर जहांगीर खान के घर पहुंचे तो जहांगीर खान ने खुद को पुष्पा बताया था. यह वही जहांगीर खान है जो 4 मई को सत्ता परिवर्तन के बाद फालता के लोगों के बीच से गायब हो चुका था. वह आखिरी बार पुनर्मतदान से दो दिन पहले देखा गया, जहां उसने मैदान छोड़ने की घोषणा कर दी थी. इसके बाद वह फरार हो गया.
