सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में कॉमन सर्विस सेंटर अथवा साइबर कैफे में अन्नपूर्णा भंडार योजना का फॉर्म भरवाने पहुंची महिलाओं की भीड़ और फार्म भरवाने में उत्साह देखते बन रहा है. महिलाओं को लगता है कि ऑनलाइन फॉर्म जमा करते ही उनके खाते में ₹3000 आ जाएंगे. ताकि इसमें वह पीछे ना रह जाएं, इसलिए वह ₹200 से लेकर ₹300 खर्च करके ऑनलाइन फॉर्म जमा करवा रही हैं.
लेकिन महिलाओं के खाते में ₹3000 तो नहीं आए, अलबत्ता काॅमन सर्विस सेंटर ओर कैफे संचालकों की जेब जरूर गर्म हो रही है. उनके पास बात करने के लिए भी फुर्सत नहीं है. सुबह से लेकर देर रात तक वे अन्नपूर्णा भंडार योजना का काम करते हैं. प्रत्येक महिला से 200 से लेकर ₹300 तक वसूले जा रहे हैं.
महिलाओं को सिर्फ यही पता है कि जैसे ही अन्नपूर्णा भंडार योजना का फॉर्म सबमिट होगा, उनके खाते में सरकार ₹3000 डीबीटी के जरिए ट्रांसफर कर देगी. लेकिन क्या यही सच है? आज आप भी अन्नपूर्णा भंडार योजना का सच जरूर जानें. अन्नपूर्णा भंडार का फॉर्म भरने वाली महिलाओं को सच्चाई का पता जरूर चलना चाहिए.
बंगाल सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि अन्नपूर्णा भंडार योजना का फॉर्म 3 महीने तक भरा जा सकेगा. यानी जून महीने से लेकर अगस्त महीने तक आप यह फॉर्म भर सकेंगे. फॉर्म भरा जाने के बाद इसका वेरिफिकेशन होगा. वेरिफिकेशन में सरकारी कर्मचारी या तो आपके घर जाएंगे या फिर फोन पर आपसे जानकारी प्राप्त करेंगे. जून महीने में सरकार 15 से लेकर 17 तारीख तक तीन दिवसीय द्वारे सरकार कैंप कर रही है. यह कैंप विभिन्न प्रकल्पों के अलावा अन्नपूर्णा भंडार का फॉर्म भरने में सहायता करने अथवा जमा करने के संदर्भ में उपयोग हो सकता है.
जब फार्म ही कंप्लीट नहीं हुआ है तो ऐसे में वेरीफिकेशन का औचित्य ही नहीं बनता है. इसमें काफी समय लगेगा. सूत्र बता रहे हैं कि वेरिफिकेशन का काम अन्नपूर्णा भंडार योजना की अवधि के बाद ही शुरू किया जा सकता है. अब सवाल है कि अगर ऐसा है तो बंगाल सरकार ने जून महीने के पहले हफ्ते में अन्नपूर्णा भंडार योजना के तहत कुछ महिलाओं के खाते में तीन-तीन हजार रुपए कैसे ट्रांसफर किए? सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सुबेंदु अधिकारी ने कहा है कि जैसे-जैसे अन्नपूर्णा भंडार का फॉर्म वेरीफाई होता जाएगा, महिलाओं के खाते में तीन-तीन रूपये ट्रांसफर किए जाते रहेंगे.
लेकिन क्या शुभेंदु अधिकारी ने यह कहा है कि अन्नपूर्णा भंडार का मौजूदा फॉर्म जमा करें और तुरंत पैसे पाएं. उन्होंने यह बात कही तो जरूर है, पर यह बात लक्ष्मी भंडार, जिसे अन्नपूर्णा भंडार नाम दिया गया है, के संदर्भ में है.जून के पहले हफ्ते में पश्चिम बंगाल सरकार ने जून महीने का लक्ष्मी भंडार जिसे अब अन्नपूर्णा भंडार कहा जा रहा है, का पैसा राज्य की 27 लाख से ज्यादा महिलाओं के खाते में ट्रांसफर किया था.
तो क्या यह पैसा अन्नपूर्णा भंडार फॉर्म जमा करने के एवज में मिला था? बिल्कुल नहीं. पैसे डीबीटी लिंक के जरिए जारी करने के अवसर पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्वयं कहा था कि जब तक अन्नपूर्णा भंडार योजना की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक महिलाओं के खाते में (अन्नपूर्णा भंडार) लक्ष्मी भंडार के पैसे भेजे जाते रहेंगे.
सूत्र बता रहे हैं कि जिन महिलाओं के खाते में इस महीने तीन-तीन हजार रुपए ट्रांसफर किए गए हैं, वह पुराने लक्ष्मी भंडार के पैसे हैं. जो अन्नपूर्णा भंडार में परिवर्तित हो चुका है. मुख्यमंत्री सूबेदु अधिकारी ने माना है कि पहले तो हमारा विचार था कि लक्ष्मी भंडार के सभी लाभार्थियों के खाते में पैसे ट्रांसफर किए जाएं.लेकिन जब फार्म की जांच हुई तो टीएमसी सरकार में लक्ष्मी भंडार के नाम पर की गई धांधली का भी पता चला. उन्होंने कहा कि जांच के क्रम में 30 लाख से ज्यादा नाम फर्जी पाए गए हैं. यही कारण है कि सरकार एक बार फिर से लक्ष्मी भंडार डीटेल्स की चेक करवा रही है.
विभिन्न जिलों के नगर पालिकाओं, पंचायत, ब्लॉक, ऑफिस, बीडीओ ऑफिस, एसडीओ ऑफिस आदि से डाटा संग्रह किया जा रहा है. अब तक लक्ष्मी भंडार के जितने फॉर्म क्लियर हो चुके हैं, उन्हें ही पैसे ट्रांसफर किए गए. बाकी फॉर्म की जांच चल रही है. ऐसे में जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, महिलाओं को अन्नपूर्णा भंडार के पैसे नहीं मिलेंगे.
यहां यह भी समझ लेना चाहिए कि अन्नपूर्णा भंडार के नाम पर वर्तमान में महिलाएं जो फॉर्म भर रही है और जिन्हें जमा किया जा रहा है, उस फॉर्म का संबंध अन्नपूर्णा भंडार से कतई नहीं है. यह तो एक पारिवारिक विवरण है जो फार्म के जरिए आप दे रहे हैं. बहरहाल देखना होगा कि लक्ष्मी भंडार के बाकी लाभार्थियों के खाते में सरकार कब तक पैसे ट्रांसफर करती है.

