June 16, 2026
Sevoke Road, Siliguri
प्रमुख हेडलाइंस और अपडेट्स

पर्यटन के क्षेत्र में उत्तर बंगाल की बनेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान!

पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री शंकर घोष के इरादे बुलंद हैं. सादा जीवन और उच्च विचार रखने वाले शंकर घोष अपनी जिम्मेदारी को अच्छी तरह समझते हैं और बंगाल की जनता को आश्वस्त भी करते हैं कि सरकार से उन्हें जो जिम्मेदारी मिली है, उसे अपनी तरफ से बेस्ट देने की कोशिश करेंगे. और शायद यही कारण है कि अपनी प्रकृति के अनुरूप शंकर घोष ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ पर्यटन मंत्रालय का कार्यभार संभालते ही पर्यटन के क्षेत्र में भविष्य के बंगाल के बारे में संकेत दे दिया है.

शंकर घोष के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं. इससे पहले पर्यटन मंत्रालय का काम देख चुके पूर्व पर्यटन मंत्री गौतम देव ने भी इस दिशा में यथा संभव कुछ करने का प्रयास जरूर किया था. लेकिन वे इसमें कितना सफल हो सके, यह बताने की जरूरत नहीं है. अब शंकर घोष इन चुनौतियों को स्वीकार करते हैं और भविष्य के लिए पर्यटन के क्षेत्र में नई योजना और नए विचार के साथ उतरना चाहते हैं.आखिर बंगाल पर्यटन के क्षेत्र में ऐसा क्या क्रांतिकारी बदलाव लाना चाहते हैं, जिससे कि विश्व पर्यटन मानचित्र पर बंगाल की पहचान बने?

कल 17 सितंबर को इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है .इस बैठक में पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए कई नई योजनाओं और प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा और एक ब्लूप्रिंट तैयार किया जाएगा, जिसे राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा. जाहिर है इस बैठक में सड़क से लेकर पर्यटक स्थलों की नई पहचान को लेकर कई योजनाओं को सामने रखा जाएगा. उदाहरण के लिए पहाड़ में ट्रैफिक की समस्या काफी पुरानी है. आज भी घूम से दार्जिलिंग तक काफी जाम देखा जाता है.कई बार पर्यटक इस जाम का शिकार हो जाते हैं और समय पर पर्यटक स्थल पर नहीं पहुंच पाते हैं.

डॉक्टर शंकर घोष की कोशिश होगी कि पहाड़ में जाम की समस्या से निजात पाने के लिए स्थाई समाधान का मार्ग तलाशा जाए. इसके अलावा पर्यटक स्थलों की स्वच्छता, देखरेख,प्रबंधन संपर्क सड़कों के निर्माण से लेकर अतिथि देवो भवो की पुरानी परंपरा को कायम रखना, के अलावा और भी बहुत से मुद्दे हो सकते हैं. कल की बैठक में एक सर्वमान्य फार्मूला ढूंढने की कोशिश की जाएगी. अगर बंगाल को खासकर उत्तर बंगाल को विश्व पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलानी है तो उसके लिए योजनाओं का निर्धारण भी विश्व स्तरीय किया जाना जरूरी है. पर्यटन मंत्री इसके लिए हर संभव प्रयास करने का उत्साह दिखा चुके हैं.

उत्तर बंगाल में चाय बागान और पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं. यहां किया जाने वाला बदलाव या विकास कुछ इस तरह से होना चाहिए कि चाय बागान का भी नुकसान नहीं हो और पर्यटन के क्षेत्र में भी काफी सुधार हो. मंत्री शंकर घोष इस बात को अच्छी तरह समझते हैं और इसीलिए उन्होंने अपनी भविष्य की योजनाओं को चाय बागान के संरक्षण तथा पर्यटन विस्तार के समायोजन पर केंद्रित रखने की बात कही है. वे कहते भी हैं कि चाय उद्योग का संरक्षण और विकास तो होगा ही, इसके साथ ही पर्यटन का विस्तार भी किया जाएगा. पर्यटन विस्तार का यह मतलब नहीं है कि चाय उद्योग को नुकसान पहुंचाया जाए.

उत्तर बंगाल में कई पर्यटक स्थल हैं, जो आज भी उपेक्षित हैं. लेकिन अगर उनका विकास और विस्तार हो तो पर्यटन के क्षेत्र में उनकी महत्वपूर्ण उपस्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता है.पर्यटन मंत्री की कोशिश होगी कि उदासीन या विकास के हाशिए पर पहुंच चुके पर्यटक स्थलों को नया जीवन दिया जाए और उनका नए सिरे से कायाकल्प किया जाए ताकि पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज करा सके.

कल होने वाली बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.इस बैठक में ऐसे काफी सारे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी और एक मसौदा तैयार करने की भी उम्मीद की जा रही है. बहरहाल उत्तर बंगाल को विश्व पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के लिए पर्यटन मंत्री शंकर घोष के पिटारे से और क्या नई बात सामने आती है, यह कल की बैठक में ही पता चल सकेगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *