पहाड़ में जीटीए में कुछ ना कुछ तो गड़बड़ जरूर है. अगर ऐसा नहीं होता तो मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पहाड़ में जीटीए को लेकर दिए गये भाषण और दोषियों को जेल भेजने की चेतावनी के एक दिन बाद ही जीटीए प्रमुख अनित थापा ने अपने पद और सभासद से इस्तीफा नहीं दिया होता. फिलहाल इसके संकेत पर राजनीतिक विश्लेषकों ने अध्ययन करना शुरू कर दिया है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव ने विपक्षी दलों के राजनीतिक गणित को बिगाड़ कर रख दिया है. समतल और पहाड़ के बड़े-बड़े राजनीतिक योद्धा चुप हैं. क्योंकि सत्ता अब उनके हाथ से जा चुकी है. पहाड़ में अजय एडवर्ड और अनित थापा चुनाव जीतने के लिए क्या कुछ नहीं कर पाए थे. लेकिन अब ऐसे शांत हुए हैं जैसे वे कभी राजनीति में थे ही नहीं. जीटीए में भ्रष्टाचार का मुद्दा काफी समय से उठाया जाता रहा है. लेकिन जब सत्ता थी अनित थापा के पास तो उन्होंने इसकी कभी कोई परवाह नहीं की.
मुख्यमंत्री सुबेंदु अधिकारी के पहाड़ दौरे के साथ ही उन्होंने अपने भाषण से जो संदेश दिया है, उसने GTA में हडकंप मचा कर रख दिया है. अनित थापा जीटीए प्रमुख और जाने-माने सभासद रहे. अचानक उन्होंने क्यों इस्तीफा दिया. कहीं ना कहीं, कोई ना कोई बड़ी बात जरूर है. शायद उन्होंने समय की नजाकत को भांप लिया है. कल को अपमानित न हो, उससे पहले ही खुद को किनारे कर लेना उन्होंने ज्यादा अच्छा समझा है.
पहाड़ में एक नई राजनीति शुरू हो चुकी है. विमल गुरुंग सक्रिय हो गए हैं. दार्जिलिंग पहाड़ पर कभी सुप्रीमो सुभाष घीसिंग की तूती बोलती थी. विमल गुरुंग उनके सहयोगी हुआ करते थे. सुभाष घीसिंग के बाद 2007 में विमल गुरुंग एक बड़ी शक्ति के रूप में उभरे और गोरखालैंड की मांग को लेकर पहाड़ में हिंसक आंदोलन चलाया. इसी विमल गुरुंग ने दार्जिलिंग लोकसभा सीट से भाजपा को चुनाव जिताने में 2009 से ही मदद की है.अब भारतीय जनता पार्टी की सरकार विमल गुरुंग को इनाम देना चाहती है.
इस समय पहाड़ की तीनों सीटों पर भाजपा का कब्जा है. विमल गुरुंग गदगद हैं और कोलकाता से उनका सीधा कनेक्शन है. मंगलवार को जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी कर्सियांग की यात्रा पर थे तो उनके मंच पर उनका स्वागत करने के लिए आए विमल गुरुंग को उन्होंने गले से लगा लिया. भाषण में उनका नाम भी लिया और यह संकेत है कि पहाड़ में बदलाव शुरू हो चुका है.
शुभेंदु अधिकारी ने पहाड़ में सौगातों की बौछार कर दी है. कालिमपोंग में मेडिकल कॉलेज, शिक्षा, रोजगार और सड़क संपर्क को लेकर उन्होंने कई बड़ी घोषणाएं की है. उन्होंने गोरखा युवाओं के लिए भर्ती का भी ऐलान कर दिया है. इससे पहाड़ काफी खुश है. राजनीतिक विश्लेषकों ने अपने अनुभव और अध्ययन में बताया है कि पहाड़ में विमल गुरुंग और राजू बिष्ट की जोड़ी भविष्य की राजनीति को प्रभावित करने वाली है. इन दोनों ही नेताओं के हाथ में पहाड़ की बागडोर जाने वाली है. अनित थापा का इस्तीफा यह संकेत है कि पहाड़ में इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है.
पहाड़ में गोरखालैंड तो नहीं मिलेगा, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव में पहाड़ से जो वादा किया है, उस दिशा में बंगाल सरकार आगे बढ़ रही है. मुकदमे को वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. बहरहाल देखना होगा कि पहाड़ में शुरू हुई नई राजनीति पहाड़ को किस दिशा में ले जाती है.

