June 19, 2026
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कालिमपोंग और अलीपुरद्वार में स्थापित होने वाले नए मेडिकल कॉलेज खास क्यों, जानिए आप भी!

समतल से लेकर पहाड़ तक में स्वास्थ्य सेवा में एक नई क्रांति लाने की तैयारी तेज हो गई है. कालिमपोंग में बनने वाले नए सरकारी मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि चिन्हित करने से लेकर इसकी रूपरेखा मानकों के अनुरूप तय करने को लेकर हलचल बढ गई है. अलीपुरद्वार के लोगों को भी मेडिकल कॉलेज और शिक्षण संस्थान मिलने जा रहा है.

मेडिकल कॉलेज तो आपने बहुत देखे होंगे. सिलीगुड़ी में ही उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल भी है. लेकिन कालिमपोंग और अलीपुरद्वार में स्थापित होने वाले नए मेडिकल कॉलेज की जो रूपरेखा तैयार की जा रही है, उससे पता चलता है कि ये मेडिकल कॉलेज अपने आप में अद्भुत होंगे. इनकी कई विशेषताएं जानकर आप हैरान रह जाएंगे!

उत्तर बंगाल में नए सिरे से स्वास्थ्य परिसेवा का न केवल विस्तार हो रहा है, बल्कि इसे उन्नत बनाए जाने की रूपरेखा भी तैयार कर ली गई है. सरकार की मंशा साफ है कि पूरे बंगाल को स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा सके. सरकार चाहती है कि बंगाल के छात्रों और मरीजों को पढ़ाई तथा इलाज के लिए अन्य राज्यों में जाना ना पड़े. इसी मंशा के साथ स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है.

मिली जानकारी के अनुसार सरकार ने कालिमपोंग, अलीपुरद्वार, उत्तर दिनाजपुर और पश्चिम बंगाल में नए सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है. स्थापित किए जाने वाले मेडिकल कॉलेज की प्रस्तावना में कहा गया है कि प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में 100 एमबीबीएस सीटों की व्यवस्था होनी चाहिए और इसी के अनुरूप ही भूमि चयन से लेकर अन्य संबंधित तैयारी की सलाह दी गई है.

पश्चिम बंगाल मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से सभी संबंधित जिलों के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारियों से कहा गया है कि वे इसी के अनुरूप उपलब्ध भूमि का ब्यौरा भेजें. यह निर्देश 18 जून को जारी किया गया है. इसमें साफ कहा गया है कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मानकों के अनुरूप मेडिकल कॉलेज तथा संबंधित शिक्षण अस्पताल और छात्रावास की स्थापना होनी चाहिए. और इसके लिए आवश्यक भूमि तथा अन्य आधारभूत संरचना का चयन किया जाए. अगर जगह की कमी दिखती है तो अस्पताल से 10 किलोमीटर के दायरे में लगभग 20 एकड़ सरकारी भूमि की पहचान कर उस बारे में सरकार को सूचित किया जाए.

जिस तरह के मानकों को तय किया गया है, अगर उसके अनुसार योजना को परवान चढ़ाया जाता है, तो एक साथ एक जगह पर इतना बड़ा सरकारी भूखंड उपलब्ध नहीं होने पर उसे दो परिसर में स्थापित किये जा सकते हैं. अगर एक परिसर में उपलब्ध होता है तो जाहिर है अथवा इस बात की पूरी संभावना है कि यह शहरी क्षेत्र से काफी दूर हो सकता है. या फिर आबादी क्षेत्र में होने पर दो हिस्सों में विभाजित किया जा सकता है. निर्देश में भी कहा गया है कि मेडिकल कॉलेज और शिक्षण अस्पताल एक ही परिसर या अधिकतम दो परिसरों में स्थापित किए जा सकते हैं. ले

लेकिन अगर दो परिसरों में यह स्थापित होता है तो उनके बीच की दूरी 10 किलोमीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. अन्य निर्देशों में कहा गया है कि मेडिकल कॉलेज में कम से कम 420 बेड और पूरे साल 80% बेड ऑक्युपेंसी अनिवार्य होनी चाहिए. इस तरह का पैमाना और मानदंड तैयार किया गया है. सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को इस दिशा में प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार करने और उसे सरकार के पास भेजने के लिए कहा गया है.

जिला स्वास्थ्य अधिकारियों से रिपोर्ट मिलने के बाद इंजीनियरों की टीम मौके पर जाएगी और उसका विस्तृत परीक्षण करेगी. इसके साथ ही केंद्र सरकार को डीपीआर भेजा जाएगा. केंद्र सरकार ने पहले ही राज्य सरकार को इसकी तैयारी करने का संकेत दे दिया था. जाहिर है कि यह परियोजना जब पूरी होगी तो उत्तर बंगाल के साथ-साथ दक्षिण बंगाल के कई जिलों में स्वास्थ्य और चिकित्सा व्यवस्था उन्नत हो सकेगी. इसके साथ ही छात्रों के लिए मेडिकल शिक्षा के अवसर बढ़ जाएंगे.

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