पूरे साल जमाई खाक छानते रहे हों, ससुराल में कभी सम्मान तो कभी अपमान होता हो, लेकिन साल का एक दिन ऐसा भी आता है जब जमाई राजा बन जाते हैं अथवा ससुराल में उनका स्वागत एक राजा की तरह ही होता है. यह दिन जमाई षष्ठी होता है. बंगाल का यह सांस्कृतिक एवं पारंपरिक त्योहार है, जो सदियों से चला आ रहा है.
मूलत: यह बंगाली परिवार का पारंपरिक त्यौहार है, परंतु आधुनिक समय में सभी समुदाय एवं वर्गों में यह त्यौहार उतने ही उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. जमाई षष्ठी त्यौहार मनाने का एकमात्र मकसद पारिवारिक संबंधों को मजबूती देना है. यह त्यौहार सास और दामाद के रिश्ते की मजबूती और आपसी सम्मान का प्रतीक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि पारिवारिक संबंधों को मजबूती तथा समृद्धि प्रदान करने के उद्देश्य से इस त्यौहार की शुरुआत की गई थी.
यह त्यौहार एक धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि परिवार के रिश्तों को मजबूत करने वाला सांस्कृतिक उत्सव भी माना जाता है. आज सिलीगुड़ी समेत पूरे बंगाल में जमाई षष्ठी का त्यौहार उमंग एवं उल्लास के साथ मनाया गया. परंपरा के अनुसार इस दिन सास अपने दामाद और बेटी को घर पर आमंत्रित करती है. दामाद सास के घर पहुंचता है, जहां राजा की तरह ही उसका स्वागत किया जाता है.
जमाई षष्ठी के दिन दामाद को विशेष रूप से सम्मान दिया जाता है. जैसे ही दामाद अपनी पत्नी के साथ ससुराल पहुंचता है, ससुराल के लोग उनका विशेष तौर पर स्वागत करते हैं. दामाद का तिलक लगाकर उनकी कलाई पर सास धागा बांधती है तथा उनके सुख समृद्धि और सफलता की कामना करती है. खाने में दामाद को विभिन्न तरह के पारंपरिक पकवान और उनकी पसंद की वस्तुएं परोसी जाती है.
दामाद को नए वस्त्र प्रदान किए जाते हैं. इसके अलावा आज का दिन खाने का विशेष महत्व रहता है .आमतौर पर दोपहर के भोजन में भात, दाल, पांच तरह की तली हुई सब्जियां, कोसा मांशो, इलिश भापा, मछली, मिठाइयां और कई मौसमी फल परोसे जाते हैं. पांच तरह के फल, मिठाइयां स्वादिष्ट भोजन और नाना प्रकार के व्यंजन देखकर जमाई प्रसन्न हो जाते हैं.
सास दामाद की हर फरमाइश को पूरी करती है. सास की कोशिश यह होती है कि दामाद हमेशा सुखी और खुशहाल रहे. जमाई षष्ठी का त्यौहार केवल खाने पीने का त्यौहार नहीं है बल्कि यह दो परिवारों के प्रेम, सम्मान और रिश्तों की मिठास का प्रतीक भी है.हर साल ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है.
आज बाजार में फल और मिठाइयों और मछली की दुकानों पर ग्राहकों की काफी भीड़ देखी गई. दुकानदारों ने फलों के दाम काफी बढ़ा दिए थे. कहीं-कहीं तो दो सामान्य आकार के सेब ₹100 में बिकते देखे गए. इसके अलावा आज मछलियों की दुकानों पर भी ग्राहकों की काफी भीड़ देखी गई. सामान्य दिनों की अपेक्षा मछलियां ज्यादा महंगी बिकी. सिलीगुड़ी में धूमधाम से यह त्यौहार मनाया गया है.
