पिछले 1 महीने से विद्यालय में अजीबोगरीब घटनाएं घट रही थीं. संदेशखाली का यह फुलमणि आदर्श विद्या मंदिर था, जो उत्तर 24 परगना जिले के अंतर्गत आता है. यह काफी पुराना विद्यालय है. माध्यमिक स्तर के इस विद्यालय में खेल मैदान से लेकर विद्यालय परिसर, विद्यालय भवन इत्यादि यूं तो सब कुछ ठीक-ठाक रहता था. लेकिन पूरे विद्यालय परिसर में कक्षा 9 विद्यालय के बच्चों की दहशत का केंद्र बन गया था.
यह दहशत कैसी थी, केवल महसूस ही किया जा सकता था. भौतिक रूप से दहशत का कोई कारण नहीं था. खासकर इस कक्षा में पढ़ने वाली छात्राएं हमेशा डरी सहमी रहती थीं. कारण क्या था, किसी को कुछ पता नहीं था. लेकिन जैसे ही विद्यालय के इस भवन में लड़कियों का प्रवेश होता, लड़कियां अचानक ही भयभीत हो जाती थीं. कभी-कभी एक अज्ञात करुण आवाज सुनाई पड़ने लगती थीं, मुझे बचाओ… बचाओ! जैसे कोई लड़की सहायता के लिए आवाज लगा रही हो. आवाज काफी दूर से आती हुई प्रतीत होती थी.
पिछले 1 महीने से विद्यालय के इस भवन में अजीब अजीब घटनाएं घट रही थीं. कभी-कभी अचानक तेज हवाओं का शोर होने लगता, तो कभी अज्ञात आवाज, कभी किसी नारी के रोने और सिसकने की आवाज लड़कियां महसूस करने लगी थीं. कक्षा 9 में पढ़ने वाली इन लड़कियों ने इस बारे में कभी किसी को कुछ बताया नहीं था, यह सोचकर कि कोई उनकी बातों का विश्वास नहीं करेगा. लेकिन वे अंदर ही अंदर अज्ञात डर व चिंता से दो-चार हो रही थीं. इससे उनकी पढ़ाई भी बाधित हो रही थी. स्कूल के प्रिंसिपल या शिक्षकों आदि किसी को भी कुछ पता नहीं था.
31 जुलाई को रोजाना की तरह विद्यालय आई कक्षा 9 की लड़कियों ने जैसे ही अपनी कक्षा में प्रवेश किया. उसके बाद से उनकी स्थिति खराब होने लगी. लड़कियों ने अचानक सांस लेने में तकलीफ, हाथ पैर में अकड़न, किसी के सिर में दर्द तो किसी को उल्टी की शिकायत होने लगी. आरंभ में उन्होंने सोचा कि कुछ देर में सब ठीक हो जाएगा. लेकिन धीरे-धीरे उनकी स्थिति और बिगड़ती चली गई.कम से कम 32 छात्राएं थीं और सभी की हालत लगातार खराब हो रही थी.
विद्यालय के शिक्षकों को बच्चियों के अचानक बीमार पड़ने की घटना के बारे में बताया गया तो वे भी भागे दौड़े कक्षा 9 में पहुंचे. उन्होंने छात्राओं की स्थिति को देखा. कुछ छात्राएं तो कक्षा में ही चीख पुकार मचा रही थीं, तो कुछ छात्राएं दर्द के कारण भवन में ही लेट गई थी और बेचैनी में अपने हाथ पैर चला रही थीं. शिक्षकों ने इस घटना की जानकारी पुलिस और वरिष्ठ शासन अधिकारियों को दी. तब तक इन छात्रों को निकटवर्ती अस्पताल में ले जाने के लिए इमरजेंसी मेडिकल वैन भी बुला लिया गया था. छात्राओं को निकटवर्ती स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, फिर वहां से उन्हें मिनाखां ग्रामीण अस्पताल पहुंचाया गया.
अब तक इस घटना के बारे में छात्राओं के अभिभावकों को भी सूचना मिल गई थी. इसलिए वे भी दौडे भागे अस्पताल पहुंच गये थे. कुछ देर में ही संदेशखाली के विधायक सनत सरकार भी विद्यालय पहुंच गए. उन्होंने अपनी गाड़ी से कुछ छात्राओं को अस्पताल पहुंचाया और उनका इलाज करवाया. बसीरहाट स्वास्थ्य जिले के उपमुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर श्यामल कुमार विश्वास भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने स्थिति का जायजा लिया. अस्पताल के डॉक्टरो ने भर्ती 32 छात्राओं में 30 छात्राओं को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया. जबकि दो छात्राओं को अस्पताल की निगरानी में रखा गया.
संदेशखाली के फूलमनी आदर्श विद्या मंदिर में अपनी तरह की यह पहली घटना थी, जहां एक साथ 32 छात्राएं बीमार हो गई थीं. इससे विद्यालय ही नहीं बल्कि आसपास के इलाकों के लोग भी दहशत में आ गए थे. आखिर इन छात्राओं को क्या हुआ था? पुलिस ने भी अपना काम करना शुरू कर दिया. अधिकारी भी घटना का कारण जानने की कोशिश करने लगे. ऐसा कैसे हो सकता था कि एक साथ दर्जनों छात्राएं अचानक बीमार पड़ जाएं! उनके अभिभावकों से भी पूछताछ की गई. लेकिन यह घटना क्या थी, किसी को भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था.
पुलिस और अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में कुछ बातें निकल कर सामने आई, जिससे पता चल गया कि आखिर इस घटना का राज क्या था! दरअसल कुछ वर्ष पहले इस विद्यालय के कक्षा 9 की एक छात्रा ने आत्म हत्या कर ली थी. कुछ ही समय पहले इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था. बरसों पहले छात्रा के द्वारा की गई आत्महत्या और हाल ही में जारी वीडियो के कारण छात्राएं दहशत में आ गई थी और उन्होंने यह मान लिया था कि कक्षा में आत्म हत्या करने वाली छात्रा भूत बन गई है. भूत शब्द उनके दिमाग में गूंज रहा था.यही उनका भय और मानसिक तनाव बढ़ाने का एक बड़ा कारण था.
पुलिस और अधिकारियों की प्रारंभिक जांच और अनुमान में भी यही बातें सामने आई है. पुलिस और अधिकारियों ने माना है कि छात्राओं के अचानक बीमार होने के पीछे पैनिक अटैक यानी अत्यधिक घबराहट है. आसपास और विद्यालय में भी कक्षा 9 में भूत होने की अफवाह भी उड़ाई जा रही थी. इससे भी छात्राएं काफी प्रभावित थीं. यह बात उनके दिमाग में बुरी तरह बैठ गई थी और उन्होंने इसे भूत प्रेत से जोडकर देखना शुरू कर दिया था. हालांकि विज्ञान के इस युग में भूत प्रेत पर यकीन नहीं किया जा सकता है. पश्चिम बंगाल विज्ञान मंच के सदस्य प्रदीप सरकार भी मानते हैं कि भूत प्रेत कुछ नहीं होता है. विज्ञान कभी अलौकिक घटना को आधार नहीं मानता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि रासायनिक गैस, भोजन या अन्य पर्यावरणीय कारणों की जांच की जाए तो समस्या का निदान हो सकता है. उन्होंने बताया कि किसी एक छात्र में उत्पन्न भय अन्य छात्राओं में फैलने से सामूहिक मानसिक प्रतिक्रिया जैसी स्थिति भी बन सकती है. यही कारण है कि एक साथ कई छात्राएं बीमार हुई. स्वास्थ्य विभाग ने भी कहा है कि भूत प्रेत जैसी कोई बात नहीं है.
घटना कैसे घटी, इसकी जांच की जानी चाहिए. स्वास्थ्य विभाग छात्राओं की मानसिक काउंसलिंग पर जोर दे रहा है. विद्यालय में मनोचिकित्सक की सहायता ली जाएगी. स्वास्थ्य विभाग ने यह कदम उठाया है और फैसला किया है कि विद्यालय के बच्चों की काउंसलिंग कराई जाएगी. स्वास्थ्य विभाग का यह कदम प्रशंसनीय कहां जा सकता है.
