भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मानसून के दूसरे चरण को लेकर चिंता जताई है। विभाग के अनुसार, अगस्त और सितंबर के दौरान देशभर में औसत वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है। इसकी प्रमुख वजह प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो की स्थिति को माना जा रहा है, जिसका भारतीय मानसून पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, जुलाई महीने में बंगाल की खाड़ी में लगातार बने निम्न दबाव के सिस्टम ने मानसून को मजबूती दी और देश के कई हिस्सों में सामान्य से बेहतर बारिश दर्ज की गई।
मौसम वैज्ञानिकों ने मानसून सीजन की शुरुआत में ही अल नीनो के प्रभाव के कारण कमजोर वर्षा की आशंका जताई थी। लेकिन जून और जुलाई के दौरान बंगाल की खाड़ी में बने कई लो-प्रेशर सिस्टम ने इस अनुमान को काफी हद तक संतुलित कर दिया। इन मौसम प्रणालियों के कारण ओडिशा, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में अच्छी बारिश हुई।
आईएमडी के अनुसार, जुलाई के दौरान बंगाल की खाड़ी में चार प्रमुख निम्न दबाव क्षेत्र विकसित हुए, जिनका असर सामान्य से कहीं अधिक दिनों तक बना रहा। इन प्रणालियों के कारण देश के मध्य और पूर्वी हिस्सों में लगातार वर्षा हुई, जिससे जून के अंत तक बना बारिश का बड़ा घाटा काफी हद तक कम हो गया। जुलाई के अंत तक देश में मानसूनी वर्षा का कुल घाटा घटकर लगभग 13 प्रतिशत रह गया।
अच्छी बारिश का सबसे बड़ा लाभ कृषि क्षेत्र को मिला है। खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आई और किसानों को पर्याप्त नमी मिलने से खेती की गतिविधियों को गति मिली। जुलाई के अंत तक बोए गए रकबे में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया, जिससे खाद्यान्न उत्पादन को लेकर उम्मीदें भी बढ़ी हैं।
हालांकि, मौसम विभाग ने आगाह किया है कि मानसून का दूसरा चरण चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि अल नीनो का प्रभाव और अधिक मजबूत होता है, तो अगस्त और सितंबर में कई क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की जा सकती है। इसका असर विशेष रूप से वर्षा आधारित कृषि, जलाशयों के जलस्तर और पेयजल उपलब्धता पर पड़ सकता है।
फिर भी आईएमडी का अनुमान है कि प्रायद्वीपीय भारत, मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों तथा पूर्वोत्तर के चुनिंदा क्षेत्रों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा होने की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग ने किसानों और राज्य सरकारों को मौसम पूर्वानुमानों पर लगातार नजर रखने तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कृषि और जल प्रबंधन की योजना बनाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दो महीने देश के मानसून की समग्र तस्वीर तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

