August 22, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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अमित शाह का पहाड़ पर जादू चल गया? राजू बिष्ट ने क्यों कहा, गोरखाओं की अब तक की बड़ी जीत!

Did Amit Shah's magic work in the mountains? Why did Raju Bisht say this was the Gorkhas' biggest victory yet?

आखिर अमित शाह ने ऐसा क्या कर दिया कि राजू बिष्ट को कहना पड़ा कि पहाड़ के गोरखाओं को वो मिलने जा रहा है, जिसके लिए वे वर्षों से आंदोलन कर रहे थे? उन्होंने ऐसा क्यों कहा कि गोरखाओं का सपना साकार होने जा रहा है? हालांकि यह बात राजू विष्ट पहले से ही कहते आ रहे हैं. लेकिन आज गोरखा प्रतिनिधि मंडल और अमित शाह के बीच मैराथन बैठक में ऐसा क्या फैसला हुआ कि बैठक समापन के बाद गोरखा प्रतिनिधि और भाजपा नेता बाग बाग दिखाई दे रहे हैं.

सबसे बड़ा सवाल, आखिर फैसला क्या हुआ? इसके बारे में ना तो कोई भाजपा नेता और ना ही गोरखा प्रतिनिधि स्पष्ट जवाब दे रहे हैं. राजू बिष्ट पहाड़, समतल और Dooars के गोरखाओं को सस्पेंस में रखना चाहते हैं. हालांकि पहाड़ के कुछ लोगों की जुबानी चर्चा है कि खोदा पहाड़, निकली चुहिया! चलिए और देर ना करते हुए इस पूरे मसले पर चर्चा करते हैं.

पहाड़ में गोरखाओं की अलग-अलग समस्याएं और मांगे बरसों से चल रही हैं. इन समस्याओं में सामाजिक, भौगोलिक, क्षेत्रीय और जनजाति समस्याएं काफी पुरानी हैं. अपनी विभिन्न मांगों को लेकर गोरखा बरसों से आंदोलन कर रहे हैं. जब राज्य और केंद्र सरकार ने उनकी समस्याओं की अनदेखी की, तब दार्जिलिंग में गोरखालैंड का आंदोलन शुरू हुआ और पूरा पहाड ठप्प पड़ गया. गोरखालैंड आंदोलन काफी हिंसक और वीभत्स आंदोलन था.

जब राज्य में माकपा की सरकार थी, उसके बाद टीएमसी की सरकार सत्ता में आई, लेकिन इन सरकारों ने अपनी तरफ से कोई पहल नहीं की और जीटीए को ही इसके लिए अधिकृत करके अपना पल्ला झाड़ लिया. पहाड़ में जीटीए एक छोटी शासकीय इकाई है. उसकी अपनी सीमाएं हैं.लेकिन गोरखाओं की अलग-अलग मांग राज्य और देश से जुड़ी हुई है और इसका समाधान जीटीए नहीं कर सकता है. अब राज्य और केंद्र में भाजपा की सरकार है. इसलिए गोरखाओं को लगता है कि वर्षों पुरानी उनकी मांगों को मनवाने के लिए यह उचित समय है.

हालांकि गोरखालैंड अब पीछे छूट चुका है. गोरखाओं की मौजूदा समस्या उनकी पहचान, शिक्षा, रोजगार और भविष्य की सुरक्षा को लेकर है. इसके लिए काफी समय से गोरखा आंदोलन कर रहे हैं. पहाड़ से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक आंदोलन हुए हैं. जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन भी हुए थे. आखिरकार केंद्र सरकार ने एक मेडिएटर की नियुक्ति की, जिनका नाम पंकज कुमार सिंह है.

पंकज कुमार सिंह की नियुक्ति तो काफी समय पहले ही हो चुकी है. परंतु अब तक मेडिएटर की भूमिका में वह कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ पाए हैं. लोकसभा चुनाव से लेकर विधानसभा के चुनाव भी हो चुके हैं. हर चुनाव में गोरखाओं से वादे किए जाते हैं. 2026 के राज्य विधानसभा चुनाव में भी गृह मंत्री अमित शाह ने पहाड़ के लोगों को आश्वस्त किया था कि राज्य में भाजपा की सरकार बनने के 6 महीने के भीतर गोरखाओं की समस्याओं का राजनीतिक समाधान ढूंढ लिया जाएगा.

भाजपा अपने संकल्प पत्र को पूरा करने की दिशा में अग्रसर हो गई है. आज इसी चिर प्रतीक्षित मसलों और मांगों को सुलझाने के लिए सिलीगुड़ी के न्यू चामटा के एक रिसॉर्ट में एक मैराथन बैठक हुई थी. इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, पहाड़ के कई राजनीतिक नेता, भाजपा नेता राजू बिष्ट और अन्य लोग उपस्थित थे. इस बैठक में पहाड़ की विभिन्न समस्याओं और मसलों पर विचार किया गया. इसके बाद गोरखाओं की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए एक खास कमेटी बनाने का फैसला किया गया है.

अमित शाह के साथ बैठक में और क्या फैसला किया गया और ऐसी कौन सी महत्वपूर्ण बातें हुई है जो अभी तक मीडिया की निगाह में नहीं है और यही कारण है कि भाजपा नेता राजू बिष्ट से लेकर गोरखा जन्म मुक्ति मोर्चा के नेता रोशन गिरी अपने बयानों में सिर्फ यही बता रहे हैं कि इसके लिए एक कमेटी बनाई जा रही है जो गोरखाओं की विभिन्न समस्याओं पर फोकस करके एक ब्लूप्रिंट तैयार करेगी और उसे केंद्र और राज्य के समक्ष दुर्बोधन के लिए अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा

राजू बिष्ट मानते हैं कि यह पहाड़ और गोरखाओं की भारी जीत है. देखा जाए तो मेडिएटर और कमेटी गोरखाओं की कुंडली से जुड़ी हुई है. मेडिएटर्स काफी पहले से ही हैं. जबकि इन मुद्दों पर विचार और समाधान के लिए कई बार कमेटी का भी गठन किया गया. लेकिन कुछ नहीं हुआ. कभी पहाड़ के नेताओं की आपसी टकराहट व अहम तो कभी किसी और बहाने से कई बार कमेटी बिना वजूद के ही भंग होती रही. इस बीच पहाड़ में भी संगठनों के नेता चुटकी ले रहे हैं, खोदा पहाड़ निकली चुहिया!

लेकिन राजू बिष्ट को भरोसा है, इस बार सरकार ने पूरी तैयारी के साथ समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया है. ऐसा पहली बार हुआ है जब खुद गृह मंत्री ने सिलीगुड़ी में आकर इस बैठक में सक्रियता से भाग लिया और लोगों को आश्वस्त किया. पंकज कुमार सिंह से उनकी जो भीतरी बात हुई है, उसके बाद मेडिएटर पंकज कुमार सिंह की सक्रियता देखी जा रही है.वे पहाड़ के दूसरे राजनीतिक और सामाजिक नेताओं से मुलाकात करेंगे. पहाड़ में अलग-अलग समस्याएं हैं. सामाजिक मसले भी हैं. उन पर विचार और अध्ययन का काम उनके नेतृत्व में गठित कमेटी करेगी.

राजू बिष्ट के हवाले से मिल रही जानकारी के अनुसार कमेटी जल्द अपना काम शुरू कर देगी और जब अगली बैठक होगी तो उस समय तक तस्वीर साफ हो जाएगी. अगर ऐसा होता है तो यह राजू बिष्ट के संघर्ष, साधना और पुरूषार्थ की जीत होगी. क्योंकि उन्होंने इस मसले को उचित मंचों पर कई बार उठाया है और केंद्र सरकार को समाधान के लिए तैयार भी कराया.

बहरहाल यह देखना होगा कि कमेटी का अगला कदम क्या होता है. जो भी हो, इतना तो स्पष्ट है कि पहाड़ की सभी समस्याओं का हल संवैधानिक दायरे में ही किया जाएगा. यह बात खुद राजू बिष्ट भी बताते हैं. अमित शाह के साथ मैराथन बैठक के बाद राजू बिष्ट, पहाड़ के नेता और संगठनों के लोग आशा भरी नजरों से कमेटी के उठाए जाने वाले कदमों की ओर देख रहे हैं.

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