June 26, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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पहाड़ में GTA की कुर्सी कौन संभालेगा या बोर्ड होगा भंग?

Who will take over the GTA chair in the hills or will the board be dissolved?

सिलीगुड़ी में सिलीगुड़ी नगर निगम भंग हो चुकी है. पहाड़ में जीटीए प्रमुख अनित थापा इस्तीफा दे चुके हैं और उनका इस्तीफा मंजूर भी कर लिया गया है. फिलहाल कोई नया दावेदार सामने नहीं आ रहा है. अजय एडवर्ड की चर्चा जरूर है, लेकिन लगता नहीं है कि उन्हें यह मौका मिलेगा. तो ऐसे में GTA की कमान कौन संभालेगा या फिर सिलीगुड़ी नगर निगम की तर्ज पर बोर्ड होगा भंग?

फिलहाल पहाड़ में दो तरह की चर्चाएं हो रही हैं. नए बोर्ड का गठन करना और स्थाई राजनीतिक समाधान? देखा जाए तो नए बोर्ड के गठन में किसी की भी दिलचस्पी नहीं है. क्योंकि जीटीए बोर्ड का कार्यकाल 13 महीनो में समाप्त हो जाएगा. कोई भी नेता 13 महीनो के लिए जीटीए की गाड़ी में बैठने के लिए खुद को तैयार नहीं कर पा रहा है. अजय एडवर्ड का एक वीडियो जारी हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा है कि 13 महीनो के लिए जीटीए की कुर्सी पर बैठने का उन्हें कोई शौक नहीं है.

पहाड़ में राजनीति की दो मुख्य धुरी है. अनित थापा और अजय एडवर्ड. अनित थापा के बाद उनके ही ज्यादा सभासद है. ऐसी चर्चा है कि अजय एडवर्ड के सभासद चाहते हैं कि उनके नेतृत्व में नया जीटीए बोर्ड का गठन हो. दूसरी तरफ राजू बिष्ट हैं जो GTA बोर्ड पर अपने पसंदीदा नेता को बैठते देखना चाहते हैं. अलग राज्य कोऑर्डिनेशन कमेटी के सदस्य दिव्यानंद राई नहीं चाहते हैं कि राजू बिष्ट इस मामले में जीटीए पर हस्तक्षेप करें.

उनका एक वीडियो वायरल हुआ है. इसमें उन्होंने कहा है कि राजू विष्ट को संसद में गोरखाओं की आवाज उठाने तथा स्थाई राजनीतिक समाधान सुनिश्चित करने के लिए चुना गया है. उन्हें स्थानीय राजनीति में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. कुछ नेताओं का मानना है कि राजू बिष्ट स्थाई राजनीतिक समाधान के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए जीटीए की सरगर्मी बढा रहे हैं. अजीब सी राजनीतिक स्थिति पहाड़ पर बनती जा रही है. कोई नहीं जानता कि पहाड़ की राजनीति किस दिशा में जाने वाली है.

कुछ ही समय पहले पहाड़ में अजय एडवर्ड, विनय तमांग, राजेश चौहान समेत लगभग 20 सभासदों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी. इस बैठक के बाद पहाड़ में कयासों का दौर जारी है. लोगों का कहना है कि जीटीए बाद में है. पहले गोरखालैंड और स्थाई राजनीतिक समाधान है. सरकार वचन दे चुकी है. केंद्र और राज्य में बीजेपी की सरकार है.ऐसे में सरकार को स्थाई राजनीतिक समाधान की बात करनी चाहिए.

भाजपा नेताओं को संगठनों की ओर से धमकी दी गई है कि अगर स्थाई समाधान के मुद्दे को नहीं उठाया गया तो पहाड़ में आंदोलन जोरदार किया जा सकता है. दिव्यानंद राई जैसे कई अन्य नेता यही चाहते हैं कि पहाड़ पर क्षणिक कुछ नहीं बल्कि एक शाश्वत व्यवस्था होनी चाहिए.गोरखालैंड के मुद्दे पर विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों के नेता एक राय रखते हैं.भाजपा चाहती है कि GTA में भ्रष्टाचार के मुद्दे का जल्द से जल्द निराकरण होना चाहिए.भाजपा जीटीए में भ्रष्टाचार की जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई को लेकर एक फैसला कर सकती है.

इस्तीफा देने के बाद मौके की नजाकत को भापते हुए तथा पहाड़ की जनता का विश्वास हासिल करने के लिए अनित थापा ने गोरखालैंड की राह पकड़ ली है.उन्होंने अलग-अलग बटे गोरखा भाई-बहनों के लिए एकता की आवाज के बहाने दूरगामी राजनीति पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है.वे कहते हैं कि अगर जाति एक रहेगी तो पार्टी बची रहेगी. सूत्र बता रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी सर्वप्रथम जीटीए में भ्रष्टाचार की जांच कराना चाहती है. बहुत संभव है कि GTA बोर्ड को भंग कर दिया जाए और प्रशासक नियुक्त करके पहाड़ की जनता की सेवा की जाए.

आपको बताते चलें कि GTA में कुल 50 सभासद है. 45 सीधे चुने गए हैं और पांच राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए गए हैं. सदन में बीजीपीएम के 33 सदस्य हैं. अजय एडवर्ड्स की इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट के 6,टीएमसी का एक और पांच निर्दलीय सभासद है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी की सरकार फिलहाल जीटीए बोर्ड भंग करना नहीं चाहेगी और एक प्रशासक के जरिए सिलीगुड़ी की तर्ज पर पहाड़ में भी शासन प्रशासन का संचालन कर सकती है. पर मौजूदा स्थितियों में कोई भी आकलन करना जल्दबाजी होगी.

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